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AI के युग में 'अस्तित्ववाद' (Existentialism): क्या ChatGPT और AI रोबोट्स इंसानी ज़िंदगी का 'अर्थ' (Meaning) छीन लेंगे?

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AI के युग में 'अस्तित्ववाद' (Existentialism) रात के तीन बजे ChatGPT से पूछा — "मुझे बता, मेरी ज़िंदगी का मतलब क्या है?" हाँ, मैंने किया। तीन बजे रात को, बेड पर लेटा-लेटा, फोन की रोशनी में, मैंने वो सवाल टाइप किया जिसे हर इंसान कभी न कभी टाइप करता है। ChatGPT ने 9 सेकंड में लिख दिया — "जीवन का अर्थ व्यक्तिपरक है। यह आपके मूल्यों, रिश्तों, और अनुभवों से निर्मित होता है। आप अपने लक्ष्यों और दूसरों के साथ जुड़ाव में अर्थ पा सकते हैं।" बहुत सही जवाब था। बिल्कुल टेक्स्टबुक जैसा। परफेक्ट grammar, परफेक्ट tone, परफेक्ट balance. मैंने फोन रखा। और पूरी रात सो नहीं पाया। क्योंकि एक AI ने मुझे वो जवाब दे दिया था जो मैं खुद ढूँढ रहा था — पर उस जवाब ने मुझे खाली कर दिया। उस रात मुझे पहली बार समझ आया कि अस्तित्ववाद (Existentialism) की बातें सिर्फ किताबों में नहीं होतीं। वो तब शुरू होती हैं जब कोई मशीन तुमसे ज्यादा सही जवाब दे दे — और तुम महसूस करो कि तुमने वो जवाब अपने दर्द से नहीं, बल्कि उसने डेटाबेस से निकाला। सार्त्र के "अस्तित्व सार से पहले" को AI ने ...