Socratic Method (सुकरात की पद्धति) और Modern EdTech: क्या Google और AI के दौर में हमारे 'सवाल पूछने' की क्षमता खत्म हो रही है?
Socratic Method (सुकरात की पद्धति) और Modern EdTech “गूगल पर टाइप करो, जवाब मिलेगा। पर सवाल कहाँ गया?” मैं उस दिन एक क्लास में बैठा था। टीचर ने पूछा — “तुम्हें क्या लगता है, लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी क्यों ज़रूरी है?” पहली बेंच का एक लड़का तुरंत उठा। उसने कहा — “मैम, ठीक एक मिनट।” उसने फोन निकाला, गूगल असिस्टेंट खोला, टाइप किया, और 30 सेकंड में उसने परफेक्ट आंसर पढ़ सुनाया। टीचर ने कहा — “बहुत अच्छा। पर मैंने तुमसे तुम्हारी राय पूछी थी, गूगल की नहीं।” वह लड़का चुप हो गया। क्योंकि उसके पास अपनी कोई राय नहीं थी। उसने कभी सोचा ही नहीं था कि सवाल का जवाब उसके अंदर भी हो सकता है। उसे तो बस “सही जवाब” ढूँढ़ना आता था। उस दिन मुझे सुकरात याद आ गया। वह शख्स जो एथेंस की गलियों में घूमता था और लोगों से सिर्फ सवाल पूछता था — जवाब नहीं देता था। क्योंकि उसे लगता था कि सही सवाल पूछना, गलत जवाब देने से ज्यादा ज़रूरी है। पहली कड़ी: सुकरात ने कभी “गूगल” नहीं चलाया — और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी सुकरात की पद्धति (Socratic Method) बहुत सीधी है — तुम एक सवाल पूछते हो, सामने वाला जवाब देता है,...